Saturday, June 29, 2019

जिंदगी तो खुद ही नाजुक है “पंकज”

सियासत की गली में मोड़ बहुत हैं !
इस गन्ने में रस कम,पोर बहुत हैं !!

ऐ जिंदगी तू मुझे बेरुखी से ना देख,
संघर्ष भरे रण में यहाँ रणछोड़ बहुत हैं !!

सियासत तो कभी साफ सुथरी ना रही,
पर आजकल करनेवाले गठजोड़ बहुत हैं !!

गिरे बहुत ऊंचाई से हम तो पता चला,
हमको हमीं से जोड़नेवाले जोड़ बहुत हैं !!

 मुद्दा उठा तो आया नहीं सामने कोई
बटी खैरात तो मचानेवाले होड़ बहुत हैं !!

जिंदगी तो खुद ही नाजुक है “पंकज”,
फिर क्यों होते यहाँ तोड़ फोड़ बहुत हैं??

©️ पंकज