Friday, February 8, 2013

खुबसूरत तू भी है और तेरा एहसास भी


खुबसूरत तू भी है और तेरा एहसास भी

हर पल मुझे यूँ ही आती रहोगी रास भी

ख्यालों में मेरे कभी कभी आस पास भी

घुलती रहेगी मेरी सांसों में तेरी सास भी

Saturday, January 5, 2013

ज़माने की मुझे फिकर नहीं मेरे मौला


कभी कभी वो मेरे आसपास होता है

दिल भी अजीब है ये उदास होता है

पास हो तो परवाह नहीं तनिक भी 

पर दूर होकर ही कोई खास होता है

फलक पे आफ़ताब हो या हों तारें

हरेक पल उसी का एहसास होता है

ज़माने की मुझे फिकर नहीं मेरे मौला

मुर्शीद ही मेरा हरदम खास होता है

.........................................पंकज

रिश्ते में बढीं गलतफहमियां तो आज ही “पंकज”


टूटकर शाखों से पत्ते की तरह बिखर जाऊंगा !

इक दिन जिंदगी तेरे राह से यूँ गुजर जाऊंगा !!

सिमट के आ जाएगी तू मेरे ही आगोश में ,

न आई तू तो बता मैं कहाँ औ किधर जाऊंगा ??

माना मैं तेरा गुनाहगार हूँ सूखे पत्ते की तरह

पर पतझड़ आयेगा तो क्या मैं सुधर जाऊंगा ??

बढ़के पुकारने पर भी अनसुना कर दिया तूने ,

हालात यही रहे तो सच में जीते जी मर जाऊंगा !!

दिल की पुकार है दोस्त सुनना तो पड़ेगा हरेक को

किया नजरअंदाज जो मैं उसमें ही उतर जाऊंगा !!

रिश्ते में बढीं गलतफहमियां तो आज ही “पंकज”
कसम तेरे मोहब्बत की रिश्ते से ही मुकर जाऊंगा!!

दीवानों से उनके बारे में पूछा नहीं करते “पंकज”

राहगीरों को भी अपने रास्तों का पता नहीं होता !
इधर उधर किधर से जायेंगे ये भी पता नहीं होता !!

इशारों में बतानेवाला हर कोई रहबर नहीं यहाँ ,
और रहगुज़र को भी मंजिल का पता नहीं होता !!

...
मस्ती के आलम में डूबे मस्तानो की न पूछ ,
उन्हे अपने उठे क़दमों का भी पता नहीं होता !!

निकल के चली नदी तो मुडके देखा नहीं कभी ,
खुद उसे रास्तों के मोड़ों का पता नहीं होता !!

चिंगारी को लगी हवा फिर कौन कहे उसकी
तब आग को अपने तपिश का पता नहीं होता !!

इक बार उड़ के तो देखो सपनो के परों से
आसमाँ को भी सरहदों का पता नहीं होता !!

सब कुछ सिमट के आ जाता है उसमे ही
पर औरत को खुद का ही पता नहीं होता !!

दीवानों से उनके बारे में पूछा नहीं करते “पंकज”
हवाओं को भी अपने रुख का पता नहीं होता !!

..................................................पंकज

आखिर वे कौन हैं ?


आखिर वे कौन हैं ?
जो रहते भी साथ हैं ,
शक्लें भी मिलती हैं,
और जो आस पास हैं ?
                           जिन्हें देख सहम जाती हैं बच्चियां
                           और जो करते उन्हें बदहवाश हैं 
 
                           जिनकी फितरत भी हैवानो की है
                           जो करते सबकुछ सत्यानाश हैं
आखिर वे कौन हैं ?
जो रहते भी साथ हैं
समय रहते भी हम
न काटते उनके हाथ हैं?
                          क्या हो गया है आज इन्सान को
                          खो रहा है स्वयं के ही पहचान को
                          मिट गयी दिल से करुना अगर ,
                          बचा न पाएंगे खुद के सम्मान को
आखिर वे कौन हैं ?
जो रहते भी साथ हैं
करते हैं कदमताल
औ लगाते भी दाग हैं
.................................पंकज



तारीखें बदलने से बदला नही ज़माना

बदल जाता है तारीखों से साल !
न बदल पाती इंसानों की चाल !!
हो गए हैं बद से बदतर हालात ,
इन दिनों है क्या जनाब का हाल ??

न लोग नए हैं न नयी उनकी चाल !
फिर कैसे मनाते हैं लोग नया साल ??
बेहोश तो हम पहले से ही रहे यारों ,
पैमाने में तुमने दी और शराब डाल !!

महफ़िलें सजी और नाचे भी हम तुम !
फिर अचानक क्यों हुए हम गुमशुम !!
तारीखें बदलने से बदला नही ज़माना
वही हम रहे हम वही तुम रहे तुम !!
 
..........................................पंकज

मैं सदा से ही गाता रहा हूँ तुम्हारे लिए

मैं सदा से ही गाता रहा हूँ तुम्हारे लिए
कभी खुद की धडकनों को सुनना प्रिये 


कभी चिड़ियों के चहचहाने की आवाज में
कभी कोयल के गीतों में खो जाना प्रिये


बहती नदी कोई होगी जरुर आसपास
कल कल की आवाज में मुझे पाना प्रिये

फिर भी न सुनायी पड़े मेरे गीत तो इतनी अरज
खुद ही पैरों में बांध घुंघरू स्वयं नाच जाना प्रिये

.................................................पंकज