आखिर वे कौन हैं ?
जो रहते भी साथ हैं ,
शक्लें भी मिलती हैं,
और जो आस पास हैं ?
जिन्हें देख सहम जाती हैं बच्चियां
और जो करते उन्हें बदहवाश हैं
जिनकी फितरत भी हैवानो की है
जो करते सबकुछ सत्यानाश हैं
आखिर वे कौन हैं ?
जो रहते भी साथ हैं
समय रहते भी हम
न काटते उनके हाथ हैं?
क्या हो गया है आज इन्सान को
खो रहा है स्वयं के ही पहचान को
मिट गयी दिल से करुना अगर ,
बचा न पाएंगे खुद के सम्मान को
आखिर वे कौन हैं ?
जो रहते भी साथ हैं
करते हैं कदमताल
औ लगाते भी दाग हैं
जो रहते भी साथ हैं ,
शक्लें भी मिलती हैं,
और जो आस पास हैं ?
जिन्हें देख सहम जाती हैं बच्चियां
और जो करते उन्हें बदहवाश हैं
जिनकी फितरत भी हैवानो की है
जो करते सबकुछ सत्यानाश हैं
आखिर वे कौन हैं ?
जो रहते भी साथ हैं
समय रहते भी हम
न काटते उनके हाथ हैं?
क्या हो गया है आज इन्सान को
खो रहा है स्वयं के ही पहचान को
मिट गयी दिल से करुना अगर ,
बचा न पाएंगे खुद के सम्मान को
आखिर वे कौन हैं ?
जो रहते भी साथ हैं
करते हैं कदमताल
औ लगाते भी दाग हैं
.................................पंकज
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