Saturday, January 5, 2013

रिश्ते में बढीं गलतफहमियां तो आज ही “पंकज”


टूटकर शाखों से पत्ते की तरह बिखर जाऊंगा !

इक दिन जिंदगी तेरे राह से यूँ गुजर जाऊंगा !!

सिमट के आ जाएगी तू मेरे ही आगोश में ,

न आई तू तो बता मैं कहाँ औ किधर जाऊंगा ??

माना मैं तेरा गुनाहगार हूँ सूखे पत्ते की तरह

पर पतझड़ आयेगा तो क्या मैं सुधर जाऊंगा ??

बढ़के पुकारने पर भी अनसुना कर दिया तूने ,

हालात यही रहे तो सच में जीते जी मर जाऊंगा !!

दिल की पुकार है दोस्त सुनना तो पड़ेगा हरेक को

किया नजरअंदाज जो मैं उसमें ही उतर जाऊंगा !!

रिश्ते में बढीं गलतफहमियां तो आज ही “पंकज”
कसम तेरे मोहब्बत की रिश्ते से ही मुकर जाऊंगा!!

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