बदल जाता है तारीखों से साल !
न बदल पाती इंसानों की चाल !!
हो गए हैं बद से बदतर हालात ,
इन दिनों है क्या जनाब का हाल ??
न लोग नए हैं न नयी उनकी चाल !
फिर कैसे मनाते हैं लोग नया साल ??
बेहोश तो हम पहले से ही रहे यारों ,
पैमाने में तुमने दी और शराब डाल !!
महफ़िलें सजी और नाचे भी हम तुम !
फिर अचानक क्यों हुए हम गुमशुम !!
तारीखें बदलने से बदला नही ज़माना
वही हम रहे हम वही तुम रहे तुम !!
न बदल पाती इंसानों की चाल !!
हो गए हैं बद से बदतर हालात ,
इन दिनों है क्या जनाब का हाल ??
न लोग नए हैं न नयी उनकी चाल !
फिर कैसे मनाते हैं लोग नया साल ??
बेहोश तो हम पहले से ही रहे यारों ,
पैमाने में तुमने दी और शराब डाल !!
महफ़िलें सजी और नाचे भी हम तुम !
फिर अचानक क्यों हुए हम गुमशुम !!
तारीखें बदलने से बदला नही ज़माना
वही हम रहे हम वही तुम रहे तुम !!
..........................................पंकज
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