Wednesday, December 18, 2019

लिखूं मोहब्बत कि सिर्फ तेरा नाम लिखूं

लिखूं मोहब्बत कि सिर्फ तेरा नाम लिखूं ?
उठे जब भी ख़लिश दिल-ए-पैगाम लिखूं।।

कशिश तड़प इंतजार सब्र न जाने क्या क्या
मेरे खुदा ! इनके लिए कौन सा कलाम लिखूं।।

ज़माने ने आहों फुगाँ को आखिर सुना कब है ?
यक दिल-ए-सदा के लिए कोई पयाम लिखूं।।

दे रही दस्तक तेरी आहटें सीने में मेरे जब से
जी करता है उन्हें झुक झुक के सलाम लिखूं।।

सवाल करती निगाहों को नज़रंदाज़ न करना
मौज-ए-बयार में जो डूबुं फिर राम राम लिखूं।।

© पंकज

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