लिखूं मोहब्बत कि सिर्फ तेरा नाम लिखूं ?
उठे जब भी ख़लिश दिल-ए-पैगाम लिखूं।।
कशिश तड़प इंतजार सब्र न जाने क्या क्या
मेरे खुदा ! इनके लिए कौन सा कलाम लिखूं।।
ज़माने ने आहों फुगाँ को आखिर सुना कब है ?
यक दिल-ए-सदा के लिए कोई पयाम लिखूं।।
दे रही दस्तक तेरी आहटें सीने में मेरे जब से
जी करता है उन्हें झुक झुक के सलाम लिखूं।।
सवाल करती निगाहों को नज़रंदाज़ न करना
मौज-ए-बयार में जो डूबुं फिर राम राम लिखूं।।
© पंकजकशिश तड़प इंतजार सब्र न जाने क्या क्या
मेरे खुदा ! इनके लिए कौन सा कलाम लिखूं।।
ज़माने ने आहों फुगाँ को आखिर सुना कब है ?
यक दिल-ए-सदा के लिए कोई पयाम लिखूं।।
दे रही दस्तक तेरी आहटें सीने में मेरे जब से
जी करता है उन्हें झुक झुक के सलाम लिखूं।।
सवाल करती निगाहों को नज़रंदाज़ न करना
मौज-ए-बयार में जो डूबुं फिर राम राम लिखूं।।
No comments:
Post a Comment