दैन्य भाव से पूछ पूछ कर
करती रही करूण पुकार।
कैसी सदी हमारी है यह
सुन न सके कोई चीत्कार??
हां यह भी तो सच है कि
मुर्दों में न मचती हाहाकार।।
मार काट औ जलाकर उसको
कैसे होगी जय जयकार??
चंचल चितवन पावन जीवन
सूना आंगन है बिन अबला।।
रूला बिलखा कर जीवन में
सिद्ध कौन पुरूषार्थ भला??
© पंकज
करती रही करूण पुकार।
कैसी सदी हमारी है यह
सुन न सके कोई चीत्कार??
हां यह भी तो सच है कि
मुर्दों में न मचती हाहाकार।।
मार काट औ जलाकर उसको
कैसे होगी जय जयकार??
चंचल चितवन पावन जीवन
सूना आंगन है बिन अबला।।
रूला बिलखा कर जीवन में
सिद्ध कौन पुरूषार्थ भला??
© पंकज
No comments:
Post a Comment