कभी खुद की धडकनों को सुनना प्रिये
कभी चिड़ियों के चहचहाने की आवाज में
कभी कोयल के गीतों में खो जाना प्रिये
बहती नदी कोई होगी जरुर आसपास
कल कल की आवाज में मुझे पाना प्रिये
फिर भी न सुनायी पड़े मेरे गीत तो इतनी अरज
खुद ही पैरों में बांध घुंघरू स्वयं नाच जाना प्रिये
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real feeling....
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