Saturday, January 5, 2013

मैं सदा से ही गाता रहा हूँ तुम्हारे लिए

मैं सदा से ही गाता रहा हूँ तुम्हारे लिए
कभी खुद की धडकनों को सुनना प्रिये 


कभी चिड़ियों के चहचहाने की आवाज में
कभी कोयल के गीतों में खो जाना प्रिये


बहती नदी कोई होगी जरुर आसपास
कल कल की आवाज में मुझे पाना प्रिये

फिर भी न सुनायी पड़े मेरे गीत तो इतनी अरज
खुद ही पैरों में बांध घुंघरू स्वयं नाच जाना प्रिये

.................................................पंकज

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